शहर के अनुसार मुहूर्त
हर शहर का समय उसके अपने सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय से निकाला गया है, इसलिए हर समय वहीं का स्थानीय समय है। आधी रात के बाद का समय अगले दिन की तारीख के साथ लिखा है।
दिल्ली
| धनतेरस पूजा मुहूर्त | – |
|---|---|
| प्रदोष काल (सांझ) | – |
| वृषभ लग्न (स्थिर लग्न) | – |
मुंबई
| धनतेरस पूजा मुहूर्त | – |
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| प्रदोष काल (सांझ) | – |
| वृषभ लग्न (स्थिर लग्न) | – |
जयपुर
| धनतेरस पूजा मुहूर्त | – |
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| प्रदोष काल (सांझ) | – |
| वृषभ लग्न (स्थिर लग्न) | – |
लखनऊ
| धनतेरस पूजा मुहूर्त | – |
|---|---|
| प्रदोष काल (सांझ) | – |
| वृषभ लग्न (स्थिर लग्न) | – |
पटना
| धनतेरस पूजा मुहूर्त | – |
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| प्रदोष काल (सांझ) | – |
| वृषभ लग्न (स्थिर लग्न) | – |
धनतेरस 2026: दिवाली के पांच दिनों की शुरुआत
इस साल धनतेरस शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को है। यह तारीख दिल्ली के हिसाब से हमारे पंचांग से निकली है। धनतेरस को धनत्रयोदशी भी कहते हैं, और यह कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को आती है। आपके शहर का पूजा मुहूर्त इस पेज की शहरवार समय तालिका में दिया गया है।
धनतेरस से दिवाली का पांच दिन का उत्सव शुरू होता है। इसके बाद छोटी दिवाली आती है, और फिर दिवाली की लक्ष्मी पूजा होती है। आज के दिन घर की सफाई पूरी की जाती है, शाम को दीया जलता है, और कुछ नया और काम का घर लाया जाता है।
धनतेरस का पूजा मुहूर्त कैसे बनता है
धनतेरस उस दिन मानी जाती है जिस दिन प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि चल रही हो। तिथि सूर्य और चंद्रमा की दूरी से गिनी जाती है, इसलिए हर साल अंग्रेज़ी तारीख बदल जाती है।[1] धनतेरस की पूजा शाम की पूजा है, इसलिए सूर्यास्त के बाद का समय ही मायने रखता है।
प्रदोष काल सूर्यास्त के बाद रात का पहला पांचवां हिस्सा है। पुरानी गिनती में रात के 15 मुहूर्त होते हैं, और प्रदोष इनमें से पहले तीन लेता है। इसकी लंबाई मौसम और हर शहर के सूर्यास्त के साथ बदलती है।
तालिका में पूजा मुहूर्त प्रदोष काल का वह हिस्सा है जो वृषभ लग्न में भी आता है, और जिसमें त्रयोदशी भी चल रही हो। वृषभ एक स्थिर राशि है, और परंपरा इस पूजा के लिए स्थिर लग्न को अच्छा मानती है। किसी शहर में तीनों का मेल न बने, तो वहां पूजा की पंक्ति नहीं दिखेगी, पर प्रदोष और वृषभ लग्न अलग पंक्तियों में फिर भी दिखते हैं।
धनतेरस की कथा
धनतेरस का सबसे गहरा नाता श्री धन्वंतरिजी से है, जिन्हें आयुर्वेद का जनक माना जाता है। अग्नि पुराण बताता है कि समुद्र मंथन में पहले माँ लक्ष्मीजी प्रकट हुईं, और उनके बाद श्री धन्वंतरिजी अमृत से भरा कलश हाथ में लेकर निकले।[2] इसीलिए इस दिन धन के साथ सेहत की भी पूजा होती है।
माँ लक्ष्मीजी और श्री कुबेरजी की पूजा भी इसी दिन होती है। माँ लक्ष्मीजी को समृद्धि से जोड़ा जाता है, और श्री कुबेरजी को धन के रक्षक के रूप में पूजा जाता है। धनतेरस का संदेश सीधा है, धन ईमानदारी से कमाया जाए, समझदारी से रखा जाए और शरीर स्वस्थ रहे।
कई घरों में इस शाम घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर एक दीया भी जलाया जाता है। इसे यम दीपदान कहते हैं, और यह परिवार की कुशलता की कामना से किया जाता है।
धनतेरस पूजा विधि, एक एक कदम
- पूजा का समय तालिका से देखें, या हिंदी पंचांग से त्रयोदशी की पुष्टि करें।
- घर का दरवाज़ा, रसोई, तिजोरी और पूजा की जगह अच्छी तरह साफ करें।
- चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर माँ लक्ष्मीजी और श्री कुबेरजी को स्थापित करें।
- श्री धन्वंतरिजी का चित्र हो तो उसे भी साथ रखें।
- सिक्के, गहने, बही खाते या नए बर्तन पूजा के पास रखें।
- घी का दीया जलाएं और फूल, अक्षत, रोली, फल, मिठाई और जल अर्पित करें।
- ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः का 108 बार जाप करें।
- ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कुबेराय नमः का 27 बार जाप करें।
- परिवार की सेहत, ईमानदार कमाई और सोच समझकर खर्च करने की प्रार्थना करें।
- शाम को घर के मुख्य दरवाज़े पर दीये जलाएं।
धनतेरस पर क्या खरीदें
परंपरा में सोना, चांदी, तांबा, पीतल और नए बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। इन सबके पीछे एक ही सोच है, घर में ऐसी चीज़ लाना जो टिकाऊ हो और जिसकी कीमत बनी रहे। झाड़ू खरीदने की भी परंपरा है, क्योंकि यह घर की सफाई से जुड़ी है।
खरीदारी अपने बजट में करें, और वही लें जो सच में काम आए। बड़ी खरीदारी जैसे गाड़ी या मकान के लिए मुहूर्त खोजक से सही समय देख लें। कागज़ात और कानूनी जांच भी उतनी ही ज़रूरी है जितना मुहूर्त।
क्या करें और क्या न करें
घर और पैसों की जगह साफ रखें, और पुराने खातों का हिसाब देख लें। टूटे बर्तन और बेकार सामान इसी दिन बाहर कर दें। सेहत की अनदेखी न करें, क्योंकि यह दिन श्री धन्वंतरिजी का भी है।
कर्ज़ लेकर दिखावे की खरीदारी से बचें। धनतेरस का अर्थ सोच समझकर बढ़ाया गया धन है, शोर नहीं। जो खरीदें, उसे घर की ज़रूरत के हिसाब से चुनें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
धनतेरस 2026 कब है?+
धनतेरस का पूजा मुहूर्त क्या है?
यह शाम का वह समय है जब त्रयोदशी, प्रदोष काल और वृषभ लग्न तीनों एक साथ हों। दिल्ली और चार दूसरे शहरों का यह समय इस पेज की तालिका में दिया गया है।
धनतेरस पर क्या खरीदना चाहिए?
सोना, चांदी, तांबा, पीतल, नए बर्तन या घर के काम की कोई टिकाऊ चीज़। जो भी लें, अपने बजट में लें।
क्या धनतेरस सिर्फ माँ लक्ष्मीजी की पूजा का दिन है?
नहीं। इस दिन माँ लक्ष्मीजी के साथ श्री कुबेरजी और श्री धन्वंतरिजी की भी पूजा होती है।
धनतेरस और धन्वंतरि जयंती में क्या फर्क है?
दोनों एक ही दिन पड़ते हैं। धन्वंतरि जयंती आयुर्वेद के जनक श्री धन्वंतरिजी को याद करती है, और धनतेरस उसी दिन की धन और घर की पूजा है।
क्या धनतेरस पर गाड़ी या मकान खरीद सकते हैं?
खरीद सकते हैं, पर सही घंटा मुहूर्त से चुनें और कागज़ात की पूरी जांच करें।
स्रोत
[1] सूर्य सिद्धांत, अध्याय 2, श्लोक 66। चंद्रमा के भोगांश में से सूर्य का भोगांश घटाकर तिथि निकाली जाती है। अनुवाद एबेनेज़र बर्जेस, 1860।
[2] अग्नि पुराण, अध्याय 3, श्लोक 10 और 11। समुद्र मंथन से पहले माँ लक्ष्मीजी का प्रकट होना, फिर आयुर्वेद के जनक श्री धन्वंतरिजी का अमृत कलश लेकर निकलना। अनुवाद एम. एन. दत्त, 1903।
गणना के बारे में: त्रयोदशी, प्रदोष काल और वृषभ लग्न की गणना स्विस एफेमेरिस और लाहिरी अयनांश से, हर शहर के अपने सूर्यास्त पर की गई है। तीनों के मेल से पूजा का समय चुनना पंचांग की परंपरा है, ऊपर के ग्रंथों का वचन नहीं। यम दीपदान और खरीदारी की रीत लोक परंपरा है।