शहर के अनुसार मुहूर्त
हर शहर का समय उसके अपने सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय से निकाला गया है, इसलिए हर समय वहीं का स्थानीय समय है। आधी रात के बाद का समय अगले दिन की तारीख के साथ लिखा है।
दिल्ली
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मुंबई
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जयपुर
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भाई दूज 2026: भाई बहन के प्यार का तिलक
इस साल भाई दूज बुधवार, 11 नवंबर 2026 को है। यह तारीख दिल्ली के हिसाब से हमारे पंचांग से निकली है। भाई दूज कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया को आती है, और दिवाली के पांच दिन के उत्सव को पूरा करती है। आपके शहर में तिलक का शुभ समय इस पेज की शहरवार समय तालिका में दिया गया है।
इस दिन बहनें भाई के माथे पर तिलक लगाती हैं, आरती उतारती हैं और उसकी लंबी उम्र और सुख की कामना करती हैं। भाई बहन को उपहार देता है और हमेशा साथ निभाने का वादा करता है। इसे यम द्वितीया भी कहते हैं, और महाराष्ट्र में भाऊ बीज, बंगाल में भाई फोंटा और नेपाल में भाई टीका।
तिलक का मुहूर्त कैसे तय होता है
भाई दूज उस दिन मानी जाती है जिस दिन अपराह्न काल में द्वितीया तिथि चल रही हो। तिथि सूर्य और चंद्रमा की दूरी से गिनी जाती है, इसलिए हर साल अंग्रेज़ी तारीख बदलती है।[1]
अपराह्न दोपहर बाद का समय है। पुरानी गिनती में सूर्योदय से सूर्यास्त तक का दिन पांच हिस्सों में बंटता है, और अपराह्न इनमें चौथा हिस्सा है। दिन के 15 मुहूर्तों में यह दसवें से बारहवें मुहूर्त तक चलता है।
तालिका में तिलक का समय अपराह्न का वह हिस्सा है जिसमें द्वितीया भी चल रही हो। यह पूरा दिन नहीं है, बल्कि दोपहर बाद की एक तय खिड़की है। हर शहर का सूर्योदय और सूर्यास्त अलग है, इसलिए हर शहर का तिलक समय भी अलग दिया गया है।
भाई दूज की कथा
कथा के अनुसार श्री यमजी और माँ यमुनाजी भाई बहन हैं, दोनों सूर्य की संतान। माँ यमुनाजी बार बार अपने भाई को घर बुलाती थीं, पर श्री यमजी अपने काम में इतने व्यस्त रहते थे कि आ नहीं पाते थे। आखिर कार्तिक शुक्ल द्वितीया को वे बहन के घर पहुंचे।
माँ यमुनाजी ने उनका आदर से स्वागत किया, तिलक लगाया और प्रेम से भोजन कराया। प्रसन्न होकर श्री यमजी ने कहा कि इस दिन जो भाई बहन के घर जाकर उसका आदर स्वीकार करेगा, उसके जीवन में सुख बना रहेगा। तभी से यह दिन यम द्वितीया कहलाया।
तिथियों की पुरानी सूची में भी द्वितीया का श्री यमजी से नाता मिलता है। गरुड़ पुराण बताता है कि द्वितीया को श्री यमजी, माँ लक्ष्मीजी और श्री नारायणजी की पूजा की जाती है।[2] कायस्थ परिवारों में इसी दिन श्री चित्रगुप्तजी की पूजा और कलम दवात की पूजा भी होती है।
भाई दूज की थाली
थाली में रोली या कुमकुम, अक्षत, मिठाई, दीया, फूल, नारियल का गोला और जल का लोटा रखें। कई घरों में सूखा नारियल और पान सुपारी भी रखी जाती है। थाली साफ कपड़े से ढककर तिलक के समय तक रखें।
भाई दूज तिलक विधि, एक एक कदम
- तिलक का समय तालिका से देखें, या हिंदी पंचांग से द्वितीया की पुष्टि करें।
- सुबह स्नान करें, और तिलक तक बहन चाहे तो उपवास रखे, यह परिवार की रीत पर है।
- भाई को आसन पर पूर्व या उत्तर की ओर मुंह करके बिठाएं।
- दीया जलाएं और श्री गणेशजी का ध्यान करें।
- भाई के माथे पर रोली का तिलक लगाएं और उस पर अक्षत लगाएं।
- भाई के हाथ में नारियल का गोला या मिठाई दें, और कलावा बांधें जहां यह रीत हो।
- आरती उतारें और भाई की सेहत, सही राह और खुशहाली की प्रार्थना करें।
- भाई बहन को उपहार दे और हमेशा साथ देने का वादा करे।
- जहां परिवार की परंपरा हो, भाई बहन के घर भोजन करे।
भाई बहन दूर रहते हों, तो वीडियो कॉल पर तिलक की रस्म की जा सकती है, या मन से प्रार्थना की जा सकती है। इस दिन का असली मोल साथ और याद में है, सजावट में नहीं।
क्या करें और क्या न करें
अगर रिश्ते में कोई दूरी या नाराज़गी है, तो इस दिन बात की शुरुआत करें। पहले शब्द नरम रखें, पुरानी बातें न छेड़ें। एक छोटा सा सच्चा आशीर्वाद महंगे उपहार से बड़ा है।
इस दिन को लेन देन का हिसाब न बनने दें। उपहार रिश्ते का सम्मान है, उसकी कीमत का नाप नहीं। ऐसा मज़ाक न करें जो पुराना दुख जगा दे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
भाई दूज 2026 कब है?+
भाई दूज पर तिलक का शुभ समय क्या है?
अपराह्न काल का वह हिस्सा जिसमें द्वितीया तिथि चल रही हो। हर शहर का यह समय इस पेज की तालिका में अलग दिया गया है।
क्या भाई दूज और रक्षा बंधन एक ही हैं?
नहीं। दोनों भाई बहन का पर्व हैं, पर रक्षा बंधन सावन की पूर्णिमा को राखी बांधकर मनाया जाता है, और भाई दूज दिवाली के बाद तिलक से।
अगर भाई दूर रहता हो तो क्या करें?
वीडियो कॉल पर साथ प्रार्थना करें, या तिलक के समय मन से भाई को आशीर्वाद दें। कई बहनें डाक से रोली और मिठाई भी भेजती हैं।
यम द्वितीया क्या है?
यह भाई दूज का ही दूसरा नाम है, जो श्री यमजी और माँ यमुनाजी की कथा से जुड़ा है।
क्या जिनकी बहन नहीं है, वे भाई दूज मना सकते हैं?
हां। चचेरी, ममेरी या मुंहबोली बहन से तिलक करवाया जा सकता है।
स्रोत
[1] सूर्य सिद्धांत, अध्याय 2, श्लोक 66। चंद्रमा के भोगांश में से सूर्य का भोगांश घटाकर तिथि निकाली जाती है। अनुवाद एबेनेज़र बर्जेस, 1860।
[2] गरुड़ पुराण, अध्याय 116। तिथि के हिसाब से देवताओं की पूजा, जिसमें द्वितीया को श्री यमजी, माँ लक्ष्मीजी और श्री नारायणजी की पूजा बताई गई है। अनुवाद एम. एन. दत्त, 1908।
गणना के बारे में: द्वितीया, अपराह्न काल, सूर्योदय और सूर्यास्त की गणना स्विस एफेमेरिस और लाहिरी अयनांश से, हर शहर की अपनी जगह पर की गई है। श्री यमजी और माँ यमुनाजी की कथा लोक परंपरा से आई है, ऊपर के ग्रंथों से नहीं।