शहर के अनुसार मुहूर्त
हर शहर का समय उसके अपने सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय से निकाला गया है, इसलिए हर समय वहीं का स्थानीय समय है। आधी रात के बाद का समय अगले दिन की तारीख के साथ लिखा है।
दिल्ली
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करवा चौथ 2026: चांद का इंतज़ार और पति के लिए व्रत
इस साल करवा चौथ गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को है। यह तारीख दिल्ली के हिसाब से हमारे पंचांग से निकली है। उत्तर भारत के पंचांग में करवा चौथ कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को आती है। आपके शहर में चांद निकलने का समय और पूजा मुहूर्त इस पेज की शहरवार समय तालिका में दिया गया है।
इस दिन सुहागिन महिलाएं सूर्योदय से चांद निकलने तक व्रत रखती हैं। यह व्रत पति की लंबी आयु और अच्छी सेहत की कामना से रखा जाता है। शाम को कथा होती है, और चांद देखने के बाद ही व्रत खोला जाता है।
करवा चौथ की तारीख कैसे तय होती है
हमारा पंचांग करवा चौथ उस दिन रखता है जिस दिन चंद्रोदय के समय कृष्ण चतुर्थी चल रही हो। इस व्रत का अंत चांद निकलने पर होता है, इसलिए चंद्रोदय का समय ही दिन तय करता है। तिथि सूर्य और चंद्रमा की दूरी से गिनी जाती है, इसलिए हर साल अंग्रेज़ी तारीख बदलती है।[1]
तालिका में पूजा मुहूर्त सूर्यास्त के बाद की शुरुआती शाम का समय है, जब चतुर्थी भी चल रही हो। ज़्यादातर परिवार इसी समय कथा सुनते हैं, और फिर चांद के इंतज़ार में छत या आंगन में आ जाते हैं।
चंद्रोदय का समय कैसे पढ़ें
तालिका में दिया चंद्रोदय का समय खगोलीय उदय है। यानी वह पल, जब खुले और समतल क्षितिज पर चांद उगता है। हमारे शहरों में सामने इमारतें, पेड़, धुंध और शाम का धुआं होता है, इसलिए चांद दिखने में कुछ मिनट और लग सकते हैं।
इस समय को अपने इंतज़ार की शुरुआत मानें। व्रत तभी खोलें जब चांद सच में आपको दिख जाए। हर शहर का चंद्रोदय अलग होता है, इसलिए दूसरे शहर में रहने वाली बहन या सहेली का समय आपसे अलग हो सकता है। दूसरे कैलेंडरों में छपा समय भी हमारे समय से कुछ मिनट अलग हो सकता है।
करवा चौथ की कथा
सबसे ज़्यादा सुनी जाने वाली कथा रानी वीरवती की है। वीरवती सात भाइयों की इकलौती बहन थी, और शादी के बाद पहले करवा चौथ पर भूख प्यास से बेहाल हो गई। भाइयों से उसकी हालत देखी न गई, तो उन्होंने पेड़ के पीछे दीया जलाकर उसे नकली चांद दिखा दिया।
वीरवती ने उसे चांद समझकर व्रत खोल दिया, और जल्द ही उसके पति के बीमार होने की खबर आई। कथा के अनुसार, उसने पूरे साल श्रद्धा से हर चौथ का व्रत रखा, और अगले करवा चौथ पर उसका सुहाग लौट आया। यही कथा बताती है कि इस व्रत में असली चांद देखने का इतना महत्व क्यों है।
कई घरों में सावित्री की कथा भी सुनाई जाती है, जिसने अपनी श्रद्धा और बुद्धि से पति सत्यवान के प्राण वापस मांग लिए थे। दोनों कथाओं का भाव एक है, जीवनसाथी के लिए सच्चा प्रेम और धैर्य।
सरगी: सुबह का भोजन
व्रत सूर्योदय से पहले शुरू होता है। सास अपनी बहू को सुबह के लिए सरगी देती है, जिसमें मिठाई, फल, सूखे मेवे, फेनी या सेवइयां और चाय या दूध होता है। सरगी सूर्योदय से पहले खा लें, इसके बाद चांद निकलने तक खाना और पानी नहीं लिया जाता।
पारंपरिक व्रत निर्जला होता है, यानी बिना पानी के। गर्भवती, बच्चे को दूध पिलाने वाली, बीमार या रोज़ दवा लेने वाली महिलाएं डॉक्टर की सलाह से पानी और फल के साथ व्रत रख सकती हैं। जो व्रत सेहत को नुकसान पहुंचाए, उसे परंपरा भी ज़रूरी नहीं मानती।
करवा चौथ पूजा विधि, एक एक कदम
- दिन में मेहंदी लगाएं और शाम को अपने सबसे अच्छे कपड़े और गहने पहनें।
- पूजा की थाली में मिट्टी का करवा, छलनी, दीया, सिंदूर, चूड़ियां, फल, मिठाई और जल रखें।
- सूर्यास्त के बाद, तालिका के पूजा मुहूर्त में, दूसरी व्रती महिलाओं के साथ बैठें।
- माँ पार्वतीजी, शिवजी और श्री गणेशजी का ध्यान करें।
- कथा सुनें, और कथा के बीच करवा एक दूसरे को घुमाकर दें।
- चंद्र बीज मंत्र ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्राय नमः का 108 बार जाप करें।
- चंद्रोदय के समय से छत या खुली जगह पर चांद का इंतज़ार शुरू करें।
- चांद दिखने पर करवे के जल से उसे अर्घ्य दें।
- पहले छलनी से चांद देखें, फिर उसी छलनी से पति का चेहरा देखें।
- पति के हाथ से पहला घूंट पानी और पहला कौर मिठाई लेकर व्रत खोलें।
- परिवार के साथ बैठकर भोजन करें।
आज के समय में करवा चौथ
आजकल कई जोड़े करवा चौथ का व्रत साथ मिलकर रखते हैं, और पति भी पत्नी के लिए उपवास करते हैं। कुछ लड़कियां सगाई के बाद अपने होने वाले जीवनसाथी के लिए यह व्रत रखती हैं। व्रत का भाव प्रेम और साथ निभाने का वादा है, और यह भाव हर रूप में सच्चा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
करवा चौथ 2026 कब है?+
क्या ठीक चंद्रोदय के समय व्रत खोल लें?
नहीं, चांद दिखने तक रुकें। तालिका का समय खुले क्षितिज पर चांद के उगने का है, और इमारतें या धुंध चांद को कुछ मिनट और छिपा सकती हैं।
अगर बादलों के कारण चांद न दिखे तो क्या करें?
पहले कुछ देर इंतज़ार करें, क्योंकि बादल अक्सर हट जाते हैं। पूरी शाम चांद न दिखे, तो कई परिवार चंद्रोदय का समय बीतने के बाद चांद की दिशा में अर्घ्य देकर व्रत खोलते हैं। अपने परिवार की रीत मानें।
मेरे शहर में चांद अलग समय पर क्यों निकलता है?
चांद का उदय शहर की जगह पर निर्भर करता है। पूर्व के शहरों में चांद पहले और पश्चिम के शहरों में कुछ देर बाद निकलता है, इसलिए तालिका हर शहर का समय अलग देती है।
क्या गर्भावस्था में करवा चौथ का व्रत रख सकते हैं?
अपनी डॉक्टर से पूछें। निर्जला व्रत की जगह पानी और फल के साथ व्रत रखा जा सकता है। व्रत का भाव श्रद्धा में है, भूख प्यास सहने में नहीं।
क्या करवा चौथ वेदों में लिखा है?
नहीं। करवा चौथ लोक परंपरा है, जो सदियों से परिवारों में चलती आई है। चांद को अर्घ्य देना और व्रत रखना इसके दो पुराने हिस्से हैं।
स्रोत
[1] सूर्य सिद्धांत, अध्याय 2, श्लोक 66। चंद्रमा के भोगांश में से सूर्य का भोगांश घटाकर तिथि निकाली जाती है। अनुवाद एबेनेज़र बर्जेस, 1860।
गणना के बारे में: चंद्रोदय, सूर्यास्त और चतुर्थी की गणना स्विस एफेमेरिस और लाहिरी अयनांश से, हर शहर की अपनी जगह पर की गई है। चंद्रोदय खुले, समतल क्षितिज के लिए है।
एक बात जो हम नहीं कहेंगे: हमारे पास जो शास्त्र हैं, उनमें करवा चौथ के व्रत या इसकी कथाओं का कोई वचन नहीं है। यह जीवित लोक परंपरा है और निभाने योग्य है। हम ऐसा कोई उद्धरण नहीं छापेंगे जो मौजूद ही नहीं।