शहर के अनुसार मुहूर्त
हर शहर का समय उसके अपने सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय से निकाला गया है, इसलिए हर समय वहीं का स्थानीय समय है। आधी रात के बाद का समय अगले दिन की तारीख के साथ लिखा है।
पटना
| संध्या अर्घ्य (सूर्यास्त) | |
|---|---|
| उषा अर्घ्य (सूर्योदय) |
दिल्ली
| संध्या अर्घ्य (सूर्यास्त) | |
|---|---|
| उषा अर्घ्य (सूर्योदय) |
मुंबई
| संध्या अर्घ्य (सूर्यास्त) | |
|---|---|
| उषा अर्घ्य (सूर्योदय) |
कोलकाता
| संध्या अर्घ्य (सूर्यास्त) | |
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| उषा अर्घ्य (सूर्योदय) |
रांची
| संध्या अर्घ्य (सूर्यास्त) | |
|---|---|
| उषा अर्घ्य (सूर्योदय) |
छठ पूजा 2026: डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य
इस साल छठ पूजा की तारीखें शुक्रवार, 13 नवंबर 2026 – सोमवार, 16 नवंबर 2026 हैं। यह तारीखें दिल्ली के हिसाब से हमारे पंचांग से निकली हैं। छठ चार दिन का पर्व है, जो दिवाली के कुछ दिन बाद कार्तिक शुक्ल पक्ष में आता है। संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य का आपके शहर का समय इस पेज की शहरवार समय तालिका में दिया गया है।
छठ बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के मधेस का सबसे बड़ा लोक पर्व है। आज दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और विदेशों के घाटों पर भी उसी श्रद्धा से छठ होती है। इसमें व्रती छठी मैया की पूजा करते हैं और नदी या तालाब के पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते हैं।
छठ के चार दिन
छठ के चारों दिन तिथि से तय होते हैं। तिथि सूर्य और चंद्रमा की दूरी से गिनी जाती है, इसलिए हर साल अंग्रेज़ी तारीखें बदलती हैं।[1] हमारा पंचांग हर दिन का नियम अलग से जांचता है।
पहला दिन, नहाय खाय: यह कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को होता है, उस दिन जब सूर्योदय के समय चतुर्थी चल रही हो। व्रती नदी या घर में स्नान करके शुद्ध भोजन बनाते हैं। आम तौर पर चावल, चने की दाल और लौकी की सब्ज़ी बनती है, और यही उस दिन का एक भोजन होता है।
दूसरा दिन, खरना: यह उस दिन होता है जब सूर्यास्त के समय पंचमी चल रही हो। व्रती दिन भर उपवास रखते हैं, और शाम को गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद बनाते हैं। पूजा के बाद यही प्रसाद खाकर व्रत खुलता है, और इसके बाद लगभग 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होता है।
तीसरा दिन, संध्या अर्घ्य: यह उस दिन होता है जब सूर्यास्त के समय षष्ठी चल रही हो। छठ का मुख्य दिन यही है। शाम को पूरा परिवार घाट पर जाता है, और व्रती पानी में खड़े होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं।
चौथा दिन, उषा अर्घ्य: यह अगली सुबह सप्तमी को होता है, उस दिन जब सूर्योदय के समय सप्तमी चल रही हो। भोर से पहले परिवार फिर घाट पर पहुंचता है, और व्रती उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। इसी के बाद प्रसाद लेकर व्रत खोला जाता है।
अर्घ्य का समय कैसे पढ़ें
संध्या अर्घ्य का समय षष्ठी की शाम का सूर्यास्त है, और उषा अर्घ्य का समय अगली सुबह का सूर्योदय। तालिका में ये दोनों समय पटना, दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और रांची के लिए अलग अलग दिए गए हैं। हर शहर अपने सूर्यास्त और सूर्योदय से चलता है, इसलिए कोलकाता और पटना में अर्घ्य मुंबई से काफी पहले होता है।
यह गणना समतल क्षितिज के लिए है, और इसमें एक दो मिनट का फर्क हो सकता है। घाट पर समय से पहले पहुंचें, और सूर्य को सामने देखकर अर्घ्य दें। घाट की भीड़ और पानी तक पहुंचने का समय भी ध्यान में रखें।
छठी मैया और छठ की कथा
छठ में छठी मैया और सूर्य दोनों की पूजा होती है। लोक मान्यता में छठी मैया को सूर्य की बहन माना जाता है, और माताएं उनसे अपने बच्चों और परिवार की कुशलता मांगती हैं। छठ के गीत इसी भाव से भरे होते हैं।
छठ से कई कथाएं जुड़ी हैं। एक कथा कहती है कि सूर्य पुत्र कर्ण रोज़ पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते थे। दूसरी कथा में द्रौपदी ने वनवास के कठिन दिनों में पांडवों के लिए यह व्रत रखा था।
षष्ठी तिथि और सूर्य का पुराना नाता भी है। गरुड़ पुराण तिथियों की सूची में षष्ठी को सूर्य और श्री कार्तिकेयजी की पूजा का दिन बताता है।[2] यह तिथियों की एक आम सूची है, छठ के व्रत का नियम नहीं। छठ का पूरा रूप, घाट, ठेकुआ और चार दिन का क्रम, लोक परंपरा से आया है।
संध्या और उषा अर्घ्य की विधि
- बांस के सूप या दउरा में ठेकुआ, गन्ना, केला, नारियल, नींबू, सिंघाड़ा और मौसमी फल सजाएं।
- मिट्टी का दीया और अर्घ्य के लिए तांबे का लोटा या पीतल का पात्र साथ रखें।
- घाट पर व्रती कमर तक पानी में उतरकर सूर्य की ओर मुंह करके खड़े होते हैं।
- संध्या अर्घ्य में पश्चिम की ओर, डूबते सूर्य को दूध और जल का अर्घ्य दिया जाता है।
- सूप हाथ में लेकर व्रती पानी में ही परिक्रमा करते हैं, और परिवार साथ में छठ के गीत गाता है।
- रात में घाट या घर पर दीये जलाकर कोसी भरने की रीत निभाई जाती है, जहां यह परंपरा हो।
- उषा अर्घ्य में पूर्व की ओर, उगते सूर्य को उसी तरह अर्घ्य दिया जाता है।
- अर्घ्य के बाद व्रती छठी मैया से परिवार की कुशलता की प्रार्थना करते हैं।
- व्रती प्रसाद और अर्घ्य का जल लेकर व्रत खोलते हैं।
- प्रसाद घाट पर मौजूद हर व्यक्ति में बांटा जाता है, बिना किसी भेदभाव के।
घर पर छठ
शहरों में जहां नदी या तालाब पास न हो, वहां लोग छत पर या आंगन में पानी का टब या छोटा कुंड बनाकर छठ करते हैं। सूर्य की दिशा वही रहती है, और समय भी तालिका वाला ही रहता है। छठ में घाट का आकार नहीं, मन की शुद्धता और नियम मायने रखते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
छठ पूजा 2026 कब है?+
संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य किस दिन होते हैं?
संध्या अर्घ्य तीसरे दिन षष्ठी की शाम को होता है, और उषा अर्घ्य चौथे दिन सप्तमी की सुबह। दोनों का शहरवार समय इस पेज की तालिका में दिया गया है।
छठ में डूबते सूर्य को अर्घ्य क्यों दिया जाता है?
छठ उगते और डूबते, दोनों सूर्य को प्रणाम करती है। इसका भाव यह है कि दिन का अंत भी उतना ही पवित्र है जितनी उसकी शुरुआत।
क्या पुरुष भी छठ का व्रत रख सकते हैं?
हां। ज़्यादातर व्रती महिलाएं होती हैं, पर बहुत से पुरुष भी पूरे नियम से छठ करते हैं।
क्या 36 घंटे का निर्जला व्रत हर कोई रख सकता है?
नहीं, यह बहुत कठिन व्रत है। डायबिटीज़, गुर्दे या दिल की बीमारी वाले, गर्भवती महिलाएं और रोज़ दवा लेने वाले लोग डॉक्टर की सलाह से ही व्रत का रूप तय करें।
छठ का प्रसाद ठेकुआ कैसे बनता है?
गेहूं के आटे में गुड़ और घी मिलाकर, सांचे से आकार देकर, घी में तला जाता है। इसे पूरी शुद्धता के साथ घर पर ही बनाया जाता है।
स्रोत
[1] सूर्य सिद्धांत, अध्याय 2, श्लोक 66। चंद्रमा के भोगांश में से सूर्य का भोगांश घटाकर तिथि निकाली जाती है। अनुवाद एबेनेज़र बर्जेस, 1860।
[2] गरुड़ पुराण, अध्याय 116। तिथि के हिसाब से देवताओं की पूजा, जिसमें षष्ठी को सूर्य और श्री कार्तिकेयजी की पूजा बताई गई है। अनुवाद एम. एन. दत्त, 1908।
गणना के बारे में: चारों दिन के नियम, सूर्यास्त और सूर्योदय की गणना स्विस एफेमेरिस और लाहिरी अयनांश से, हर शहर की अपनी जगह पर की गई है।
एक बात जो हम नहीं कहेंगे: हमारे पास जो शास्त्र हैं, उनमें छठ के व्रत, छठी मैया या चार दिन के क्रम का कोई वचन नहीं है। छठ जीवित लोक परंपरा है और निभाने योग्य है। हम ऐसा कोई उद्धरण नहीं छापेंगे जो मौजूद ही नहीं।