कुंडली मिलान क्या है?+
कुंडली मिलान एक प्राचीन वैदिक विधि है। इसमें वर और वधू की दो कुंडलियों की तुलना होती है। उद्देश्य है विवाह की अनुकूलता जांचना। इसे गुण मिलान या अष्टकूट मिलान भी कहते हैं। कुल 8 कूट होते हैं और अधिकतम 36 अंक मिल सकते हैं। यह विधि बृहत् पराशर होरा शास्त्र पर आधारित है।
36 गुण मिलान में कितने अंक अच्छे माने जाते हैं?+
शास्त्रों के अनुसार न्यूनतम 18 अंक जरूरी हैं। 28 से 36 अंक उत्तम मिलान माना जाता है। 21 से 27 अंक अच्छा मिलान है। 18 से 20 अंक साधारण पर स्वीकार्य हैं। 18 से कम अंक पर विचार करना जरूरी है। केवल कुल अंक नहीं, किन कूटों में अंक कम हैं यह भी देखें।
क्या नाम से कुंडली मिलान सही है?+
केवल नाम से कुंडली मिलान पूरा नहीं होता। सही मिलान के लिए जन्म तिथि, जन्म समय और जन्म स्थान तीनों चाहिए। नाम अक्षर से केवल नक्षत्र का अनुमान लगता है। पर लग्न, मंगल दोष, और सही राशि पता नहीं चलती। इसलिए पूरा जन्म विवरण देना सबसे अच्छा है।
मंगल दोष कैसे पहचानें?+
जब मंगल लग्न से 1, 2, 4, 7, 8 या 12वें भाव में हो तो व्यक्ति मांगलिक होता है। इसे मंगल दोष या कुज दोष भी कहते हैं। यह दोष विवाह में देरी या कठिनाई ला सकता है। पर कई परिहार भी हैं। मंगल अपनी राशि में हो, या गुरु की दृष्टि हो, तो दोष रद्द माना जाता है।
नाडी दोष क्या होता है?+
नाडी तीन प्रकार की होती है — आदि, मध्य और अंत्य। यदि वर और वधू दोनों की नाडी एक ही हो तो नाडी दोष बनता है। यह 8 अंक वाला कूट है, सबसे भारी। पर इसके परिहार भी हैं। एक ही राशि हो पर नक्षत्र अलग हो तो दोष रद्द माना जाता है। गुरु की स्थिति अच्छी हो तो भी प्रभाव कम होता है।
क्या 18 से कम अंक में विवाह हो सकता है?+
हां, हो सकता है पर विचारपूर्वक। कम अंक विवाह को असंभव नहीं बनाते। यह देखें कि कौन से कूट में अंक कम आए। यदि नाडी और भाकूट में अंक पूरे हों तो 18 से कम भी चल सकता है। साथ में दोनों की कुंडली में शुक्र और गुरु की स्थिति देखें। आपसी समझ और प्रेम सबसे जरूरी है।
भाकूट दोष क्या है?+
भाकूट दोष तब बनता है जब दोनों की राशियां 2-12, 5-9 या 6-8 स्थान पर हों। 2-12 में धन हानि का भय रहता है। 5-9 में संतान सुख में बाधा। 6-8 में स्वास्थ्य और मनमुटाव की चिंता। यह 7 अंक का कूट है। यदि दोनों राशियों के स्वामी ग्रह मित्र हों तो भाकूट दोष रद्द हो जाता है।
कुंडली मिलान के लिए जन्म समय क्यों चाहिए?+
जन्म समय से ही लग्न और नक्षत्र का सही पता चलता है। नक्षत्र के बिना नाडी, योनि, तारा और गण कूट नहीं जांच सकते। लग्न के बिना मंगल दोष नहीं पता चलता। अगर जन्म समय 5 मिनट भी गलत हो तो नक्षत्र बदल सकता है। इसलिए जन्म प्रमाणपत्र से सही समय लेना बेहतर है।
क्या 36 में से 36 अंक संभव है?+
सैद्धांतिक रूप से 36 में से 36 अंक संभव हैं। पर ऐसा बहुत दुर्लभ है। सभी 8 कूट में पूरे अंक आना आसान नहीं। अधिकतर अच्छे मिलानों में 28 से 32 अंक आते हैं। 36 अंक आने पर भी मंगल दोष अलग से जांचा जाता है। कुल अंक से ज्यादा जरूरी यह है कि कौन से कूट में अंक पूरे आए।
दो मांगलिक क्या विवाह कर सकते हैं?+
हां, दो मांगलिक लोगों का विवाह शास्त्रों में स्वीकार्य है। इसे मांगलिक से मांगलिक विवाह कहते हैं। माना जाता है कि दोनों का मंगल दोष आपस में निष्प्रभाव कर देता है। यह परंपरागत समाधान सदियों से चला आ रहा है। पर फिर भी दोनों कुंडलियों का पूरा मिलान जरूर करें।